यह भी स्मरणीय है कि बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के चुनावों में कई बार ऐसे प्रत्याशी सामने आते रहे हैं जो स्थानीय मुद्दों से अधिक बाहरी समीकरणों पर आधारित राजनीति करते हैं। ऐसे में लखनऊ के अधिवक्ताओं की अपेक्षाओं को समझने वाला नेतृत्व चुनना और भी आवश्यक हो जाता है।
लखनऊ की पहचान, अधिवक्ताओं की एकजुटता और बार की परंपराओं को मजबूत करने के लिए सोच-समझकर मतदान किया जाना चाहिए।दिलीप श्रीवास्तव जैसे अनुभवी और सक्रिय अधिवक्ता के समर्थन में यह अपील की जा रही है कि सभी अधिवक्ता बंधु अपने मताधिकार का प्रयोग करते हुए मजबूत, पारदर्शी और प्रभावी बार एसोसिएशन के निर्माण में योगदान दें।