दिलीप कुमार श्रीवास्तव एडवोकेट एक ऐसे अधिवक्ता हैं, जिनकी पहचान सिद्धांतों पर अडिग रहकर निरंतर संघर्ष करने वाले व्यक्तित्व के रूप में रही है। उन्होंने न कभी झुकना सीखा और न ही अपने मूल्यों से समझौता किया। भ्रष्टतंत्र के विरुद्ध आवाज़ उठाना उनके सार्वजनिक और पेशेवर जीवन का अहम हिस्सा रहा है।
स्वयं को वे “कलम का सिपाही” मानते हैं, जहाँ कलम उनके लिए केवल लेखन का माध्यम नहीं, बल्कि न्याय, सत्य और संवैधानिक मूल्यों का हथियार है। वकालत के क्षेत्र में उनका सफर संघर्षों से भरा रहा है, जिसने उन्हें आम अधिवक्ताओं की समस्याओं के प्रति संवेदनशील बनाया।
बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के चुनाव में प्रत्याशी सदस्य के रूप में दिलीप कुमार श्रीवास्तव अधिवक्ताओं के अधिकार, पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करने का संकल्प लेकर आगे आए हैं। लखनऊ उनकी जन्मभूमि और कर्मभूमि रही है, और वहीं से वे न्यायिक सुधार की इस लड़ाई को आगे बढ़ाने का आह्वान करते हैं।